अवसाद


बार जब आप यह मान लेते हैं कि डिप्रेशन एक कुदरती प्रक्रिया है, तो उससे बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं रह जाता। जब आप छोटे थे, तो डिप्रेशन में नहीं, आनंद में रहना आपके लिए कुदरती चीज थी। डिप्रेशन यानी अवसाद का अर्थ है कि आप अपने अंदर जीवन के उल्लास को कायम नहीं रख पाते। इसका असर आपके शरीर पर भी पड़ता है। अगर आप अवसाद में हैं, तो भौतिक शरीर भी परेशानी झेलता है। आपके अंदर का जीवन उल्लासमय नहीं है, उसने अपना उल्लास खो दिया है क्योंकि आप उसके साथ सही बर्ताव नहीं कर रहे हैं। दरअसल, आप कुछ बाहरी बेकार चीजों को अपने भीतर बहुत ज्यादा थोप रहे हैं। आपने अपनी जीवन-ऊर्जा के स्तर को ऊंचा रखने के लिए कुछ नहीं किया है। अवसाद एक प्रकार का कष्ट है। अगर आप आनंद नहीं, कष्ट बन गए हैं तो इसकी वजह यह है कि आपकी जीवन-ऊर्जा का एक बड़ा हिस्सा विवशता में घटित हो रहा है, चेतना में नहीं। वह एक तरह से बाहरी हालात की प्रतिक्रिया के तौर पर घटित हो रहा है। जब आपका जीवन विवशता से चलता है, तो डिप्रेशन बहुत स्वाभाविक है क्योंकि बाहरी हालात कभी भी सौ फीसदी आपके काबू में नहीं होते। दुनिया में बहुत सारी चीजें घटित हो रही हैं, अगर आप विवशता में प्रतिक्रिया करते हैं, तो उसमें खो जाना और दुखी होना स्वाभाविक है। आप जीवन के जितने संपर्क में होंगे, उतने ही दुखी होंगे। जब लोग अपने बाहरी जीवन को संभाल नहीं पाते तो वे अपने जीवन के अलग-अलग पहलूओं से भागने लगते हैं। मगर वह भी काबू से बाहर हो जाता है। आपका एक हिस्सा लगातार विस्तार की खोज में रहता है। आप लगातार सीमाओं और अपने क्रियाकलाप के क्षेत्र को बढ़ाना चाहते हैं। आपका एक दूसरा हिस्सा भी है, जो हर बार निराश हो जाता है, जब कोई चीज आपके हिसाब से नहीं चलती। डिप्रेशन अपनी उम्मीदों के पूरा नहीं होने पर होता है। अगर आज स्टॉक मार्केट मंदा हो जाए तो बहुत सारे लोग डिप्रेशन में चले जाएंगे। हो सकता है कि उनमें से बहुतों ने उस पैसे को कभी छुआ भी न हो, मगर हर दिन जब वे ग्राफ को ऊपर जाते देखते हैं, तो उनका मूड भी ऊपर जाता है। अब जब वे ग्राफ को गिरता देखते हैं, तो उनका मूड भी गिर जाता है। इसकी वजह सिर्फ यह है कि उन्होंने जैसी उम्मीद की थी, वैसा नहीं हुआ।